Text of PM’S Speech at the inauguration of ‘Construction Technology India 2019’ in New Delhi

Greetings to all those gathered here today. You are all important stakeholders in the historic effort to provide a home for every Indian. 

एक महीने में दूसरी बार मुझे Housing Sector के लोगों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला है। और यह हमारे उस commitment को दिखाता है कि मध्‍यम वर्ग के घर के सपनों को पूरा करने के लिए हम कितने गंभीर है और यहां मैं देख सकता हूं कि कई साथी हैं जो क्रेडाई के कार्यक्रम में भी मौजूद थे।

साथियों, तालकटोरा स्‍टेडियम में मेरे देश के Housing Sector उससे जुड़े युवा साथियों से कहा था कि वो Housing Sector को New India की ऊर्जा और आवश्‍यकता के हिसाब से गति दें। इसके लिए देश और दुनिया में जो construction से जुड़ी Housing से जुड़ी latest technology है उसका इस्‍तेमाल करें। आपकी मदद के लिए हमारी सरकार हर कदम पर आपके साथ खड़े रहने को तैयार है, आपके साथ चलने को तैयार है, दो कदम आगे जाने को भी तैयार है और जिसका सबसे बड़ा प्रमाण construction technology से जुड़ी यह conference है।

This is the second time I am interacting with those associated with the housing sector. This shows the desire of the Government to keep engaging with you all, know more about your good work, understand your suggestions and work towards a vibrant housing sector. It also shows your passion and commitment towards a strong housing sector, that benefits the poorest of the poor in our country. I understand that members participating in this Conference will either showcase innovative housing technologies, or will learn from the new innovations that are being showcased. This too, is very valuable.

साथियों, आज की ये कॉन्फ्रेंस या फिर ग्लोबल हाउसिंग टेक्नॉलॉजी चैलेंज की आवश्यकता इसलिए महसूस हुई क्योंकि देश में शहरों का तेज़ी से विस्तार और विकास हो रहा है। भारत उन देशों में है जहां बहुत फास्ट Urbanisation हो रहा है। तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के चलते नए घरों की आवश्यकता भी उतनी ही तेज़ी से महसूस की जा रही है।

साथियों, हमारी सरकार ने हाउसिंग सेक्टर की शक्ल बदलने के लिए सात फ्लैगशिप मिशन पर एक साथ काम किया है। स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री आवास योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना, National Urban Livelihood Mission, HRIDAY और AMRUT जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम लागू किए हैं। इसके साथ ही शहरों के ट्रांसपोर्ट में बदलाव और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाएं भी चल रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हमारे सामने अलग-अलग Geographical Conditions के हिसाब से घर बनाने की चुनौती है।

साथियों, इन चुनौतियों को ध्‍यान में रखते हुए हमारी सरकार ने construction sector के लिए एक holistic approach के साथ काम किया है। घर बनाने वालों और घर खरीदने वालों दोनों को ही किस तरह की दिक्‍कतें आ रही थी, उन्‍हें ध्‍यान में रखते हुए हमने फैसले लिए। हमने सबसे ज्‍यादा जोर affordable housing पर दिया। दूसरा, हमने real estate sector से जुड़े कानूनों को ठीक किया। तीसरा, हमने skill development पर काम किया और चौथा इन सबके साथ-साथ हमने housing sector में technology को भी improve करने पर ध्‍यान दिया है। आज का यह कार्यक्रम भी उसी की एक कड़ी है।  और मुझे याद है कि PRAGATI की एक meeting में, शायद आपको मालूम होगा कि मेरी PRAGATI की meeting क्‍या होती है, इसलिए मैं उसके विस्‍तार में जाता नहीं हूं। और PRAGATI की एक meeting में मैंने मंत्रालयों को global challenge process अपनाने की सलाह दी थी। आज मुझे खुशी है कि आज Global Housing Technology Challenge, India के जरिये आप सभी यहां पर हैं।

Friends,

A house is not only four walls. It is that place where the power to dream comes and aspirations are fulfilled. A home is as much about dignity and security, as it is about shelter. It always shocked and saddened me that in a nation like ours, several people do not have their own home. We have been working to solve this situation in the form of the Pradhan Mantri Awaas Yojana. It is my dream that every Indian has a Pukka house by 2022. And, we are walking the talk in this regard. During our tenure, over 1.3 crore houses have been made already. To give you an idea of the scale, the previous Government made only 25 lakh houses! The numbers speak for themselves. Our work does not stop at making four walls. We are ensuring the houses have water connection, power connection, Ujjwala connection and other such facilities. The quality of houses and the space per home has also improved in the last four and a half years. But, there is more to be done and for that, I seek the support of the private sector. And what better way to do it than the Global Housing Challenge. Let us work together, enhance our capacities and do something that helps the poorest of the poor.

साथियों हमारे देश में जिस तरह गरीबों और निम्‍न मध्‍यम वर्ग के लिए अपने घर का सपना दूर होता जा रहा था, वो स्थिति ठीक नहीं थी। इस स्थिति को बदलने के लिए अनेक स्‍तर पर एकसाथ काम किया। हमने कोशिश की कि गरीब और सामान्‍य मध्‍यम वर्ग को घर खरीदने में जितनी भी मुश्किल आ रही है। जो भी उसकी चिंता है, उसका एक-एक करके समाधान किया जाए। आज हमारी सरकार के प्रयासों का ही असर है कि Home Loan पर ब्‍याज दर पहले के मुकाबले कम हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तो सरकार जितनी राहत दे रही है उसके बाद लोगों को 5 से 6 लाख रुपये तक की बचत होना का अनुमान है। यानी अगर किसी ने 19-20 लाख रुपये का कर्ज 20 साल के लिए लिया है तो सरकार की योजनाओं के वजह से उसके 5-6 लाख रुपये सीधे-सीधे बचना तय है।

साथियों, हमारी सरकार ने income tax और indirect tax से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है और यह इसलिए किया गया कि गरीब और मध्‍यम वर्ग के पास एक तो घर खरीदने के लिए ज्‍यादा पैसा बचे और घर की कीमतें भी कम हो। हाल में यह दो बड़े महत्‍वपूर्ण फैसले सरकार और जीएसटी काउंसिल ने लिए। Income tax की बात करे तो 5 लाख रुपये तक की taxable income पर tax zero कर दिया गया है। इसके अलावा अब दो घरों के अनुमानित किराये पर अब कोई income tax नहीं देना होगा। इसी तरह capital tax से छूट अब एक के बजाय दो घरों पर मिलने वाली है। यह तमाम प्रयास मध्‍यम वर्ग को नये घर खरीदने के लिए प्रोत्‍साहित करने वाले हैं। जिसका सीधा लाभ आपके बिजनेस को भी होना निश्चित है। उसमें तो ताली बजा सकते हो.

साथियों, GST ने भी रियल एस्टेट के कारोबार को डेवलपर्स और ग्राहक, दोनों के लिए बहुत आसान किया है। हाल में ही कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर GST को बहुत कम किया गया है। अफॉर्डेबल हाउसिंग पर GST 8 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत किया गया है, वहीं अंडर कंस्ट्रक्शन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर GST 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया। मध्यम वर्ग के लिए बन रहे घरों के प्रोजेक्ट्स में फंडिंग की समस्या ना हो इसके लिए Affordable Housing Fund बनाया भी बनाया गया है।

Friends, We understand that in order to make more homes and better homes, we also have to be sensitive to the suggestions of those in the housing sector. And, we are doing that. We have been working to strengthen and reform the housing sector. From RERA Act, which improved consumers’ confidence in developers and brought transparency in the Real Estate Sector, to our significant improvement in the World Bank’s “Ease of Doing Business Index” driven by improvement in construction permits, where India climbed from 181st rank to 52nd place- we have been consistently focusing on systemic reforms. 

साथियों, सरकार की नीतियों की वजह से आपको एक और मदद मिलने वाली है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में Human Resource का एक बड़ा Pool विकसित हुआ है जो घर बनाने की तकनीक के बारे में जानता है, Trained है। हमारी सरकार ने इस सेक्टर में महिलाओं की ट्रेनिंग के लिए भी एक अभियान चलाया हुआ है। इस प्रशिक्षण अभियान के बाद हजारों महिलाएं रानी मिस्त्री के तौर पर काम कर रही हैं।

हमारी कोशिश है कि इस सेक्टर में युवाओं की Technical Skill को बढ़ाकर उन्हें मार्केट रेडी किया जाए, ताकि आप जैसे उद्यमियों को भी लाभ हो और युवा साथियों को भी ज्यादा रोजगार के अवसर उपलब्ध हों। इसके अलावा तेज़ी से बदलती टेक्‍नोलॉजी के आधार पर हमारे इंजीनियरिंग और टेक्‍नोलॉजी से जुड़े पाठयक्रम में भी बदलाव हों, इस दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके अलावा स्टार्ट अप्स और युवा उद्यमियों के लिए भी ये सेक्टर एक नया विकल्प बनकर उभर रहा है।

साथियों, भारत में कंस्ट्रक्शन की अप्रोच में हमने एक और बदलाव किया है। अब चाहे सड़कें हों, रेज़िडेंशियल अपार्टमेंट्स हों या फिर कमर्शियल बिल्डिंग्स, इको फ्रेंडली, Disaster-Resilient और Energy-Efficient निर्माण को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके लिए Local Innovation की जरुरत है, जिसमें हमारे युवा साथी जुटे हुए हैं।

साथियों, आपको जानकर खुशी होगी कि आशा इंडिया यानी Affordable Sustainable Housing Accelerator इस तरह के इनोवेशन्स को बाजार के हिसाब से ढ़ालने में लगा है। आशा GHTC-India का हिस्सा है। इसमें मुंबई, मद्रास, खड़गपुर और रुड़की IIT में काम कर रहे चार इन्क्यूबेशन सेंटर पर युवा उद्यमियों और स्टार्टअप ईको-सिस्टम के आइडिया को बाजार के हिसाब से उपयोगी बनाने पर तेजी से काम चल रहा है।

साथियों, मुझे ये जानकर अच्छा लगा कि इस तरह के इनोवेशन, तकनीक और इंजीनियरिंग पर काम कर रहे कुछ विद्यार्थी यहां पर भी मौजूद हैं। यहां पर होने वाली चर्चा को National Knowledge Network (NKN) पर भी ड़ाला जाएगा जिससे देश के शिक्षण संस्थाएं इसका लाभ उठा सकें। यहां जिन चुनौतियों पर चर्चा होगी उन्हें सुलझाने के लिए इसी नेटवर्क के जरिए Educational Institutes को भी मौका दिया जाएगा।

आप सभी हाउसिंग टेक्‍नोलॉजी को लेकर भारत में हो रहे इस अद्भुत प्रयोग का हिस्सा बन सकें, इसके लिए Light House Project शुरु किए जा रहे हैं। गुजरात, झारखंड, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश में शुरु हो रहे इन प्रोजेक्ट्स में कंस्‍ट्रक्‍शन की नई तकनीक का प्रदर्शन कर सकते है। ये आपके लिए Live Laboratories हैं। यहां पर आप वेबकास्ट डेमो जैसी Technology के माध्यम से देश के युवा प्रोफेशनल्‍स से interact कर सकते हैं।

साथियों, GHTC-India एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए भारत का  कंस्ट्रक्शन सेक्टर इको-सिस्टम इंटरनेशनल लेवल का बन सकता है। इसके माध्यम से हमारी चुनौतियों के Global Solution हमें मिल पाएंगे।

आपके उत्साह को देखते हुए मैं कह सकता हूं ये कंसट्रक्शन क्रांति की शुरुआत है और अब हम अपने शहरों के कंसट्रक्शन सेक्टर को Global Standard के हिसाब से बनाने की दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं।

साथियों, इस कॉन्फ्रेंस से भारत को तो लाभ होगा ही, साथ में दुनियाभर के बिल्डर, आर्किटेक्ट, प्लानर्स और Global Civil Engineering Firms, को भी इससे फायदा होने वाला है। हम एक दूसरे से बहुत कुछ सीखने वाले हैं।

साथियों, न्यू इंडिया के नए बिजनेस एनवायरनमेंट में, आपके सेक्टर के लिए बहुत संभावनाएं हैं। देश में निओ मिडिल क्लास का तेज़ी से प्रसार हो रहा है। भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में है जहां घरों की डिमांड सबसे तेज़ी से बढ़ रही है।

हम इस डिमांड को पूरी कर पाएं, कंस्ट्रक्शन में आधुनिक टेक्‍नोलॉजी का अधिक से अधिक उपयोग हो, इसके लिए मैं अप्रैल 2019 से लेकर मार्च 2020 के वर्ष को Construction Technology Year के तौर पर घोषित भी करता हूं।

साथियों, यहां आज मुझे एक Atlas का लोकार्पण करने का भी अवसर मिला है। परिस्थितियां कैसे बदलती है आपको आश्‍चर्य होगा हमारे देश में disaster related विषय सबसे agriculture department में हुआ करता था। और सालों तक वो कृषि विभाग का हिस्‍सा था, क्‍योंकि हमारे यहां disaster का मतलब बाढ़ और सूखा यहां तक सीमित सोच थी और इसलिए agriculture sector के लोग इसको handle करे, गुजरात में 2001 में भूकंप आने के बाद ध्‍यान में आया कि यह एक बहुत बड़ा challenge है और उसके बाद उस महत्‍वपूर्ण इकाई को वहां से निकाल करके Home Ministry को दी गई जो कि state का coordination करती है। यानी एक बहुत बड़ा paradigm shift था यह अटल जी की सरकार के समय किया गया। उसके बाद गुजरात में 2001 में भूकंप आया था तो पता था इन चीजों का हम घटना होने के बाद कुछ करेंगे उसके पहले हमें अब देश को इसके लिए तैयार करना चाहिए। गुजरात में पहले district level पर इस प्रकार के disaster की संभावना वाले इलाके उसके भिन्‍न-भिन्‍न तरीके I ऐसे अलग-अलग मैप district wise और village maps बनाने का प्रयास हुआ था। मुझे खुशी है कि आज भारत सरकार ने उस विषय को zone करके हिन्‍दुस्‍तान के हर क्षेत्र और मैं चाहूंगा कि construction की दुनिया से जुड़े कोई भी हो सिर्फ बिल्डिंग नहीं, कोई भी even pipe line डलाने वाले गैस की पाइपलाइन डालने भी इस Atlas को ध्‍यान में रखते हुए ही अपनी योजना करे। और मैं तो सरकार को भी कहूंगा कि अपने tender system में भी इसका reference लाना चाहिए कि आपने इस Atlas को study किया है। जहां पर आप काम करने वाले हो इस Atlas में जिन चीजों को बताया गया उसको आप कैसे address करने वाले हो। हिन्‍दुस्‍तान के किसी भी department राज्‍य सरकारों का भी, तब जा करके institutionalise होगा। उसी प्रकार से हमारे इस  के आधार पर उन-उन इलाकों में जो universities हो planning की हो या engineering की हो या architecture या structure वाले हो उनके वहां के सिलेबस भी उस area की vulnerability को ध्‍यान में रखकर बनानी चाहिए, ताकि वहां जो human resource develop होगा, क्‍योंकि वो ज्‍यादा तो उसी इलाके में काम करने वाला है तो उसको पता चलेगा कि मेरे यहां यह challenges है तो मेरे यह construction की दुनिया के काम इसी प्रकार से होंगे।

और इसलिए मैं चाहूंगा कि आप सबके यहां अपनी-अपनी कंपनी में आप सब expert लोग हैं एक Atlas पर दो-दो दिन की वर्कशॉप करनी चाहिए। Atlas समझना, उससे रिलेटिव क्‍या चीजें है उसको देखना, क्‍योंकि इन चीजों को हमें आगे ले जाना होगा और देखिए भारत की ताकत क्‍या है। बहुत सी चीजें होती है, जिस पर हमारे देश का ध्‍यान कम जाता है । आप जितने भी यह construction वाले लोग हैं भारत लम्‍बे समय के लिए अच्‍छे construction कैसे करें उसमें आपकी महारत है, लेकिन जिन्‍होंने इस बार का कुंभ का मेला देखा होगा उनको पता चलेगा कि make shift arrangement कितनी उत्‍तम बनाई जा सकती है, कितनी technology driven बनाई जा सकती है, इस देश ने करके दिखाया है।

गंगा के तट पर 40 दिन के अंदर 22 करोड़ से ज्‍यादा लोग इकट्ठे होते होंगे। हर दिन गंगा के तट पर यूरोप का एक देश एक प्रकार से इकट्ठा हो जाता हो, वहां पर स्‍वच्‍छता इतनी बढि़या हो सकती है, यह देश ने दिखाया है। इतना ही नहीं हमारा जो smart city का concept है, smart city के द्वारा technology के द्वारा central command system कैसे काम कर सकती है पूरे कुंभ के मेले में हमारे नौजवानों ने उसको करके दिखाया है। यानी हमारा देश उस सामर्थ्‍य को रखता है। हम अगर उसकी तरफ नजर करें, देखें कि किस प्रकार की व्‍यवस्‍थाएं हमारे लिए लोग विकसित कर सकते हैं। अगर make shift arrangement इतनी उत्‍तम हो सकती है, तो permanent व्‍यवस्‍थाएं तो शायद दुनिया के रूप में एक मॉडल बन सकती है। और मुझे विश्‍वास है कि यह दो दिन का हम लोगों का मंथन उन चीजों को ले करके आएगा, जो आपकी कंपनी की स्थिति को सुधारे, मुझे खुशी होगी। लेकिन इस सेक्‍टर की स्थिति को भी सुधारे, उसमें नई ताकत लाए, नई गति लाए, नयापन लाए, यह बहुत आवश्‍यक है। और आप मान करके चलिए, हिन्‍दुस्‍तान जो भी करेगा, दुनिया उसको गौर से देखती है। इस देश की ताकत है dictionary के शब्‍दों के अर्थ बदल देता है। कभी अभिनंदन का अंग्रेजी होता congratulations और अब अभिनंदन का अर्थ बदल जाएगा। यह ताकत इस देश में है।

आइये उस हाथ पर विश्‍वास को ले करके चले, एक पराक्रमी राष्‍ट्र के रूप में आगे बढ़ना है और सपनों को पूरा करने के लिए समयबद्ध, समय सीमा में एक के बाद एक कदम उठाना है, सरकार आपके साथ है।

एक बार फिर आप सभी को इस कॉन्फ्रेंस के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !!!

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अतुल तिवारी/वन्‍दना जाटव/बाल्‍मीकि महतो/तारा खंडेलवाल

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